महर्षि पिप्पलाद और शनि देव ( Maharishi Piplad and Shani Dev )

श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं। इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी …

दधीचि की आरती ( Maharshi Dadhichi Ki Aarti )

ॐ जय जय ऋषि स्वामी , प्रभु जय जय ऋषि स्वामी ।पर उपकारी दाता , हो अन्तर यामी ।। ओउम् ।। नारायण की नाभी कमल से ब्रह्मा प्रकट हुए ।ब्रह्मापुत्र अथर्वा तिनसे आप भये ।। ओउम् ।। तिथि अष्टमी भादव सुदी में , आप जन्म लीना ।सनकादिक ब्रह्मादिक स्वास्ति पठन कीना ।। ओउम् ।। दधीचि …