दाधीच होकर के दाधीच का ( Poem )

दाधीच होकर के दाधीच का,
आप सभी सम्मान करो |


सभी दाधीच एक हमारे
मत उसका नुकसान करो |
चाहे दाधीच कोई भी हो
मत उसका अपमान करो |

जो ग़रीब हो अपना दाधीच
धन देके धनवान करो
हो गरीब दाधीच की बेटी
मिलकर कन्या दान करो |

अगर दाधीच लड़े चुनाव
शत प्रति शत मतदान करो
हो बीमार कोई भी दाधीच
उसे रक्त का दान करो |

बिन घर के कोई मिले दाधीच
उसका खड़ा मकान करो
केश अदालत में गर उसका
बिना फीस के काम करो |

अगर दाधीच दिखता भूखा
भोजन का इंतजाम करो
अगर दाधीच की हो फायल
शीघ्र काम श्री मान करो |

दाधीच की अटकी हो राशि
शीघ्र आप भुगतान करो
दाधीच को गर कोई सताये
उसकी आप पहिचान करो |

अगर जरूरत हो दाधीच को
घर जाकर श्रमदान करो
अगर मुसीबत में हो दाधीच
फौरन मदद का काम करो |

अगर दाधीच दिखे वस्त्र बिन
उसे वस्त्र का दान करो
अगर दाधीच दिखे उदासा
खुश करने का काम करो |


अगर दाधीच घर पर आये
तिलक लगा सम्मान करो
अगर फोन पर बाते करते
पहले जय परशुराम करो |

अपने से हो बड़ा दाधीच
उसको आप प्रणाम करो
हो गरीब दाधीच का बरूआ
उसकी मदद तमाम करो |

बेटा हो गरीब का पढ़ता
कापी पुस्तक दान करो
ईशवर ने गर तुम्हें नवाजा
नही आप अभिमान करो


by टी इंदानी( दाधीच) जालना महाराष्ट्र

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