अखारामजी दादाजी की आरती ( Dadaji Aarti )

आरती हरजी नंदन की दधीचि कुल, गौरव संतन की ।।टेर।।

गले में तुलसी की माला । चीमटा रत्न जड़ित बाला।
भाल पर तिलक गंध आला।
खड़ाऊँ चंदन, काटते फंदन, करें हम वन्दन,
पितामह कष्ट निकन्दन की । दधीचि कुल गौरव संतन की ।।1।।

रेशमी पीताम्बर सोहे। र्इंदु सम मुख मन्डल मोहे।
कमल सम नेत्र धनुष भौहें।
प्रभु का भजन, ध्यान में मगन, मारूत सुत
लगन, पवन सुत किकंर संतन की।
दधीचि कुल गौरत संतन की ।।2।।

शेभितम् ब्रह्मसुत्र दाता। नाम अखाराम सुखदाता
स्मरण से नवनिधियां पाता। जिवु के भ्रात, सुमिरते प्रात, तुम्हीं
पितुमात, तुम्हारे सेवक भक्तन की। दधीचि कुल गौरव संतन की ।।3।।

परसाणे सिंगड़ी जोत दादा। कटे विष भूत प्रेत व्याधा।
कलवाणी अमृत जो पाता। तांती है नीकी, भभूति अमीसी
प्राण में रमीसी, काटती भवभय बंधन की
दधीचि कुल गौरव संतन की।।4।।

पंचमी कृष्ण पक्ष सेवे। मिठार्इ श्रीफल ध्वजा मेवे।
झडूला युगल जात देवे। हूकम का तनय, चंपा करे विनय, पौत्र
की सुनिए, श्रीराम के पूजन बन्दन की
दधीचि कुल गौरव संतन की।।5।।

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